21 Jan पुण्य तिथि संघ में राजस्थानी गीतोंके रचनाकार श्री मोती सिंह राठौड़


 पुण्य तिथि ========                                                 संघ में  राजस्थानी गीतोंके रचनाकार श्री मोती सिंह राठौड़

21.01.2009

मोती सिंह जी का जन्म एक छोटे से ग्राम ठिठावता (जिला सीकर)में चैत्र शुक्ल13,वि.सं.1985 (अप्रैल1928)में हुआ* शिक्षाप्रेमी बुजुर्गों ने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपनी ओर से दस रु.मासिक पर एक अध्यापक रखा.भोजन व आवास की व्यवस्था भी गांव में कर दी.इस प्रकार गांव में शिक्षा,विद्यालय की स्थापना हुई।फिर सीकर राजघराने ने विद्यालय चलाने की जिम्मेदारी ले ली।इससे शिक्षा में और सुधार हुआ।यहीं से कक्षा चार पास  कर मोती सिंह जी और उनके बड़े भाई सीकर माधव विद्यालय में भर्ती हुए।दोनों पढ़ने में तेज थे।अतःउन्हें पांच रु.मासिक छात्रवृत्ति मिलने लगी,वे छात्रावास में रहने लगे।वे खेल,नाटक तथा अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में भी आगे रहते।उन्हें कविता लिखने का भी शौक था।कल्याण हाईस्कूल के एक कार्यक्रम में उन्होंने छात्रावास की दुर्दशा पर राजस्थानी बोली में एक कविता सुनाई।इसके लिए उन्हें पुरस्कार तो मिला ही, साथ में छात्रावास की हालत भी सुधरी।इंटर के बाद वे अध्यापक हुए।एम.एड.भी किया।कक्षा नौ में पढ़ते समय सीकर में वे संघ के सम्पर्क में आये।जयपुर में परीक्षा देते समय वहां पान के दरीबे में लगने वाली शाखा के शारीरिक कार्यक्रमों,देशभक्तिपूर्ण गीतों से वे बहुत प्रभावित हुए।नवलगढ़ से इंटर करते समय अजमेर से पढ़ने और शाखा का काम करने आये श्री संतोष मेहता के सान्निध्य में रहते हुए संघ से उनके संबंध और प्रगाढ़ हुए.1947में प्रथम वर्ष करने केे बाद वे प्रचारक बने।जनवरी 1948 में संघ पर प्रतिबन्ध लगा।संघ की योजना से वे सीकर के‘"श्री हिन्दी विद्या भवन’"में अध्यापक बने।वहां सत्याग्रह का सफल संचालन किया।प्रतिबन्ध बाद 1950में उन्होंने संघ का द्वितीय वर्ष किया.1953में बिसाऊ में सरकारी अध्यापक बने।

1982में सेवा निवृत्ति.30 वर्ष में उन्होंने प्राचार्य से लेकर जिला शिक्षाधिकारी तक अनेक जिम्मेदारियां निभाईं।वे जहां भी रहे,संघ को भी भरपूर समय दिया।कठोरता व पूर्ण निष्ठा से अपने कर्तव्य का पालन किया।सेवा निवृत्ति के बाद पूरा समय संघ को दिया।सीकर विभाग कार्यवाह रहे।प्रचारक का भांति प्रवास करते थे।फिर वे जयपुर प्रांत कार्यवाह और फिर राजस्थान क्षेत्र के कार्यवाह रहे।तब दूरस्थ क्षेत्रों में भी संघ शाखाओं में वृद्धि हुई।सभी मे वे लोकप्रिय थे।आज शाखाओं में गाये जाने वाले अधिकांश राजस्थानी गीतों के रचनाकार आप ही थे।आपने राजस्थानी के चर्चित गीतों पर ही संघ गीतों की रचना की।जय बजरंगी जय माँ काली जैसे अनेक गीतों की रचना की।

*बड़ीआयु में प्रवास में कठिनाई होने लगी,तो क्षेत्र कार्यवाह के से मुक्ति ले ली ।कार्यकर्ता उन्हें छोड़ना नहीं चाहते थे।अतःउन्होंने सीकर विभाग संघचालक का दायित्व स्वीकारा।वहां कार्यालय वे में गिर गये। इससे उनके मस्तिष्क में गहरी चोट आयी।जयपुर के चिकित्सालय में उनका इलाज हुआ,21जन.2009 को वहीं उनका देहांत हुआ ।सादर वंदन.सादर नमन

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