21 Jan *रास बिहारी बोस पुण्य तिथि



 *रास बिहारी बोस पुण्य तिथि(जन्म:25मई,1886,मृत्यु:21जन.1945) 


प्रख्यात वकील और शिक्षाविद थे।रास बिहारी बोस प्रख्यात क्रांतिकारी तो थे ही, सर्वप्रथम आज़ाद हिन्द फ़ौज के निर्माता भी थे।* प्रथम महायुद्ध में सशस्त्र क्रांति की जो योजना रासबिहारी बोस के ही नेतृत्व में निर्मित हुई थी. 1912में वाइसराय लार्ड हार्डिंग पर रासबिहारी बोस ने ही बम फेंका था। तत्कालीन ब्रिटिश सरकार की सारी शक्ति रासबिहारी बोस को पकड़ने में व्यर्थ हुई।सरकारी नौकरी में रहते हुए भी रासबिहारी बोस ने क्रांतिकारी दल का संघटन किया।उनको देश का बड़ी ही सतर्कता से भ्रमण करना पड़ता था। उनकारास क्रांतिकारी कार्यों का एक प्रमुख केंद्र वाराणसी रहा है,जहाँ वे गुप्त रूप से रह देश के क्रांतिकारी आंदोलन का संचालन करते थे। वाराणसी से सिंगापुर तक क्रांतिकारियों का संघटन बनाया।इस कार्य में उनके प्रमुख सहायक श्री पिंगले थे.21फरवरी1915का एक साथ सर्वत्र विद्रोह करने की तिथि निश्चित की ।किंतु दल के एक व्यक्ति द्वारा भेद बता दिए जाने के कारण योजना असफल हुई.ये1857 की सशस्त्र क्रांति के बाद ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का इतना व्यापक और विशाल क्रांतिकारी संघटन  बना।श्री पिंगले को फाँसी पर चढ़ना पड़ा किंतु श्री रासबिहारी बोस बच निकले।फिर रासबिहारी बोस ने विदेश जाकर क्रांतिकारी शक्तियों का संघटन कर देश को स्वाधीन करने का प्रयत्न किया.1915 में जहाज द्वारा जापान रवाना हो गए।ब्रिटिश सरकार ने जापान को उन्हें सौंपने की माँग की।जापान सरकार ने इस माँग को माना किंतु जापान की अत्यंत शक्तिशाली राष्ट्रवादी संस्था ब्लेड ड्रैगन के अध्यक्ष श्री टोयामा ने श्री बोस को अपने यहाँ आश्रय दिया।इसके बाद श्री बोस को गिरफ्तार नहीं किया। वे वहां आठ वर्षों तक रहे।फिर एक जापानी महिला से विवाह कर वहीं रहने लगे। वहीं भारतीय स्वातंत्रय संघ की स्थापना की।जापानी भाषा का सिख कर इस भाषा में भारतीय स्वतंत्रता के संबंध में पाँच पुस्तकें लिखीं।इन पुस्तकों का जापान में व्यापक प्रचार प्रसार हुआ। श्री संडरलैंड की'पराधीन भारत'शीर्षक पुस्तक का आपने जापानी भाषा में अनुवाद किया।भारतीय स्वातंत्रय संघ के संस्थापन के अलावा,प्रथम आज़ाद हिन्द फ़ौज का संघटन किया।इस सेना के प्रधान श्री मोहन सिंह थे।इसी संघटन के आधार पर नेता जी श्री सुभाषाचंद्र बोस ने द्वितीय आज़ाद हिन्द फ़ौज का संघटन किया। क्रांतिकारी आंदोलन द्वारा भारत को पराधीनता से मुक्त करने के लिए आपने जो पराक्रम दिखाया,वह स्वाधीनता आंदोलन के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।सादर वंदन।नमन।👏

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