ऐतिहासिक स्मरणीय दिवस 31मार्च का दिन अंग्रेजियत से आजादी के लिए मिल रहें है शुभ संकेत========== =1857की क्रांति के लिए 31.03.1857निश्चित=== किया गया था* हालाकि वह क्रांति इस तिथी से पहले ही शुरू हो गई थी.1857की क्रांति में अनेको शूरवीर शहीद हो गए पर एक स्वतंत्रता की आशा की किरण दिखा गए।उस क्रांति के परिणामस्वरूप अंग्रेजों का शासन हिल गया था *और भारत से ईस्ट इण्डिया कम्पनी का राज तो समाप्त हो गया पर इंग्लेंड की सरकार ने शासन.सम्हाल.लिया.* और1947में अंग्रेज भारत छोड़कर चले गए। पर अंग्रेजियत अभी भी हमको गुलाम बनाये हुए है.अब अंग्रेजियत से आजादी का सही समय आ गया.आप पूछेगें कि अब सही समय क्यों? उसका उत्तर है कि *जब अस्तित्व को कोई परिवर्तन करना होता है तो वह कोई न कोई संकेत जरुर देता है.1857की क्रांति के लिए निश्चित की तारिख-31मार्च ही थी.वंदन.अभिनंदन🙏
वीरगतिदिवस= (1)29.03.1917को यानि आज ही के दिन महान क्रातिवीर पुत्र सरदार बलवंतसिंह सहित पांच क्रातिवीर पुत्रों ने देश की आजादी के लियें अपने प्रणों की आहुति दे दी. अत:आज उन क्रांतिवीरों की शहादत का दिन है।सादर वन्दन.सादर नमन. (2)आज ही के दिन यानि 29.03.1857को महान क्रातिवीर पुत्र मंगल पाण्डे ने बेरकपुर छावनी मे अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल बजा दिया।इसके इनाम मे उन्हें 08.04.1857को(10दिन पूर्व18.04.की बजाय)को फांसी दे दी गयी।ऐसे क्रांतिवीर पुत्र मंगल पाण्डे को सादर वंदन.सादर नमन🕉🌹🙏🌹🕉🙏🌹🕉🙏🌹🕉🙏*
पंडित सीताराम चतुर्वेदी (अंग्रेज़ी: Pandit Sitaram Chaturvedi, जन्म- 27 जनवरी, 1907 ; मृत्यु- 17 फ़रवरी, 2005) हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार और पत्रकार थे। इन्होंने ‘हनुमत चरित’ पर सर्वप्रथम मौलिक कृति की रचना की थी। ‘कालिदास ग्रंथावली’ सीताराम चतुर्वेदी का एक अनूठा एवं साहसिक प्रयास था। वर्ष 1933 से 1938 तक ये 'सनातन धर्म' के सम्पादक एवं मदनमोहन मालवीय के निजी सचिव रहे थे। सीताराम चतुर्वेदी जी ने 250 से भी अधिक ग्रंथों की रचना की थी।
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