Posts

23 Jan जन्मजयंति बाला साहेब ठाकरे

Image
 जन्मजयंति बाला साहेब ठाकरे🚩🚩=*                    *बाल ठाकरे का जीवन परिचय !!* बाल केशव ठाकरे को लोग बालासाहेब ठाकरे या बाल ठाकरे भी कहते हैं. ये हम हमारे बीच नहीं हैं लेकिन ये अपने जीवनकाल में एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिनके द्वारा शिवसेना जैसी बड़ी पार्टी का निर्माण हुआ था, जो एक दक्षिणपंथी मराठी समर्थक और हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी है जो मुख्य रूप से महाराष्ट्र राज्य में सक्रिय है. *असली नाम* बाल केशव ठाकरे *=उपनाम=* बालासाहेब, हिंदू हृदया सम्राट *🚩🚩=राजीनीति पार्टी: 🚩🚩=                      🚩🚩🚩🚩=शिवसेना🚩🚩=* *जन्मदिन23जन.1926* *मृत्यु=17नवम्बर 2012* *=बालठाकरे का परिवार=              =पिता=* केशव सीताराम ठाकरे *=माता=* रमाबाई *=बहन=* पामा टिपनिस,  सुधा सुले, सरला गडकरी, सुशीला गुप्ते, संजीवनी करंदीकर *=भाई=* रमेश ठाकरे, श्रीकांत प्रबोधनकर ठाकरे *पत्नी*: मीना ठाकरे *=बच्चे=* बिन्दुमाधव ठाकरे,जयदेव ठाकरे,उद्धव ठाकरे *=पोते=* आद...

22 Jan जन्मदिन क्रांतिकारी वीरांगना नृत्यांगना अजीजन बाई

Image
 जन्मदिवस क्रांतिकारी वीरांगना  नृत्यांगना अजीजन बाई   (22.01.1824)    अजीजन का जन्म22जन. 1824को म.प्र.के मालवा में राजगढ़ नगर में हुआ.* पिता शमशेर सिंह बड़े जागीरदार थे।उसका नाम अंजुला रखा गया।एक बार सखियों के साथ हरादेवी मेले में घूमते समय अंग्रेज सिपाहियों ने उसकाअपहरण कर लिया।इस दुख में शमशेर सिंह मर गये।अंग्रेजों ने उनकी जागीर भी कब्जे में कर ली।कुछ समय तक सिपाही उसके यौवन से खेलते रहे,फिर उसे कानपुर के लाठी मुहाल चकले में 500रु0 में बेच दिया।चकले की मालकिन ने उसका नाम अजीजन बाई रखा।इस प्रकार एक हिन्दू युवती को मुसलमान बनाके कोठे पर बैठा दी।अजीजन ने समय के साथ समझौता कर पूरे मनोयोग से गीत-संगीत सीखा।इससे उसकी प्रसिद्धि चहुँ ओर फैल गयी।उन दिनों सब ओर 1857की क्रान्ति की तैयारी हो रही थी.10 मई,1857को मेरठ की घटना का समाचार पाकर अजीजन ने400वेश्याओं की "‘मस्तानीटोली’"बनाकर उसे अस्त्र-शस्त्र चलाना सिखाकर युद्ध में घायल क्रान्तिकारियों की सेवा में लगा दिया।यह जानकारी नानासाहब,तात्या टोपे आदि तक पहुँची,तो उनके सिर श्रद्धा से नत हो गये।कहते हैं कि अजीजन बाई तात...

22 Jan जन्मदिन वीर दादा जशराज

Image
 22 જાન્યુઆરી  ગૌરક્ષા માટે  મિંઢોળબંધા વીરદાદા જશરાજે  શહીદી વહોરી વીરગતિ પામ્યા હતા"* ભગવાન રામચંદ્રના આદેશથી તેમના ભ્રાતા ભરતે તે વખતના ગાંધાર પ્રદેશ પર શાસનકર્તા ને પરાસ્ત કરી પોતાનું શાસન સ્થાપી તક્ષશીલા અને કોંકણપુર નામક બે શહેર વસાવ્યા અને સ્વતંત્ર રઘુવંશી રાજ્યની સ્થાપના કરી. લોહારાણાઓનો ર્શોય, વીરતા અને મર્દાનગીભર્યો ઇતિહાસ છે. જ્યાં સુધી લોહારાણાઓનું રાજ્ય હતું ત્યાં સુધી વિદેશી આક્રમણકારો ભારત પર હુમલો કરવાની હિંમત કરી શક્યા નહોતા. રઘુવંશી એટલે ગૌ,ભ્રાહ્મણ પ્રતિપાળ ઇતિહાસકાર કર્નલ રોડ લખે છે ભારતની પ્રાચીનતમ કોઇ જાતિ હોય તો તે લોહારાણા (લોહાણા) છે. જ્યારે કર્નલ જેમ્સ રોડએ પોતાની ઇતિહાસનોંધમાં લખ્યું છે કે, ભારતના પ્રાચીન સૂર્યવંશીઓ લોહારાણાઓ વીર, શુરવીર અને ગૌરવ સંપન્ન પ્રજા છે. માના ધાવણમાંથી હિ‌ન્દુત્વ માટે પ્રેરણા મળે છે. આથી લોહારાણા વીરદાદા જસરાજને વિવિધ પ્રદેશની પ્રજા પોતાના માની તેમની પૂજા, આરાધના, વંદના કરે છે. પિતા વસુપાળ અને માતા રન્નાદેની કૂખે દાદા જસરાજનું અવતરણ થયું. પ્રાચીન સમયથી હિ‌ન્દુઓની સમૃધ્ધિ અને જાહોજલાલી ઉપર ઇસ્લામિક શાસકોની બૂરી નજર ...

22 Jan समर्थ गुरु स्वामी रामदास / पूण्य तिथि -

Image
 समर्थ गुरु स्वामी रामदास / पूण्य तिथि - 22 जनवरी जय-जय श्री रघुवीर समर्थ हिन्दू पद पादशाही के संस्थापक छत्रपति शिवाजी के गुरु, समर्थ स्वामी रामदास का नाम भारत के साधु-सन्तों व विद्वत समाज में सुविख्यात है। महाराष्ट्र तथा सम्पूर्ण दक्षिण भारत में तो प्रत्यक्ष हनुमान् जी के अवतार के रूप में उनकी पूजा की जाती है। उनके जन्मस्थान जाम्बगाँव में उनकी मूर्ति मन्दिर में स्थापित की गयी है। यद्यपि मूर्ति स्थापना के समय अनेक विद्वानों ने कहा कि मनुष्यों की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा देवताओं के समान नहीं की जा सकती; पर हनुमान् जी के अवतार वाली जन मान्यता के सम्मुख उन्हें झुकना पड़ा। स्वामी रामदास का जन्म चैत्र शुक्ल 9, विक्रम सम्वत् 1665 (1608 ई0) को दोपहर में हुआ था। यही समय श्रीराम के जन्म का भी है। सूर्याजी पन्त तथा राणूबाई के घर में जन्मे इस बालक का नाम नारायण रखा गया। नारायण बचपन में बहुत शरारती थे। सात वर्ष की अवस्था में उन्होंने हनुमान् जी को अपना गुरु मान लिया। इसके बाद तो उनका अधिकांश समय हनुमान् मन्दिर में पूजा में बीतने लगा। एक बार उन्होंने निश्चय किया कि जब तक मुझे हनुमान् जी दर्शन ...

22 Jan जन्मदिवस क्रातिवीर ठाकुर रोशनसिंह

Image
  जन्मदिवस क्रातिवीर ठाकुर रोशनसिंह  22.01.1892 अमर हुतात्मा शहीद रोशनसिंह=                भारत के स्वाधीनता संग्राम में फाँसी पाकर अपने वंश को अमर कर देने वाले अमर हुतात्मा क्रातिवीर ठाकुर रोशनसिंह -जन्म शाहजहाँपुर उ.प्र.के खेड़ा नवादाग्राम में22जन. 1892को एक सामान्य कृषक परिवार में हुआ.* कहते हैं कि पूत के पाँव पालने में ही दिखायी दे जाते हैं।रोशनसिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ।बचपन से ही वे अत्यधिक साहसी थे।भय का लेशमात्र भी उनके जीवन में दिखायी नहीं देता था।बालपन में जिस काम को करने में उनके अन्य साथी हिचकते थे,रोशनसिंह आगे बढ़कर उसे अपने सबल कन्धों पर ले लेते थे।अपने इस गुण को विकसित करने के लिए वे खूब व्यायाम करते थे.अत:उनका शरीर भी अच्छा बलिष्ठ हो गया।वे साहसी तो थे ;पर देशभक्ति की भावना भी उनमें कूट- कूट कर भरी थी.1921में हुए असहयोग आन्दोलन में शाहजहाँपुर से जो लोग जेल गये,उनमें रोशनसिंह भी थे।रोशनसिंह को दो साल की जेल हुई थी।इस दौरान बरेली जेल में उनका परिचय मवाना (जिला मेरठ,उ.प्र.)के क्रान्तिकारी विष्णुशरण दुबलिश से हुआ।यह परिचय घनिष...

22 Jan पुण्यतिथि पुण्यतिथि हैदराबाद मुक्ति संग्राम के एक तपस्वी स्वामी रामानंद तीर्थ

Image
 पुण्यतिथि हैदराबाद मुक्ति संग्राम के एक तपस्वी स्वामी रामानंद तीर्थ  (उर्फ वेंकटेश भगवानराव खेड़गीकर)  3 अक्टूबर, 1903 - 22 जनवरी, 1972)  हैदराबाद मुक्ति संग्राम के एक तपस्वी और अग्रणी कार्यकर्ता थे।  उनका जन्म बीजापुर जिले के सिंदगी में हुआ था।  उनकी शिक्षा सोलापुर के एक सरकारी स्कूल में हुई थी।  वह उस्मानाबाद जिले के हिप्पर्गा गांव के एक गुरुकुल में कार्यरत था।  आई.एस.  उन्हें 1930 में स्वामी नारायण तीर्थ द्वारा दीक्षा दी गई और स्वामी रामानंद तीर्थ बन गए।  उन्होंने अंबेजोगई में योगेश्वरी नूतन विद्यालय का जीर्णोद्धार किया। [1]

22 Jan पुण्यतिथि पाण्डुरंग सदाशिव खानखोजे

Image
 पुण्यतिथि  पाण्डुरंग सदाशिव खानखोजे  7 नवम्बर 1883 – 22 जनवरी 1967) भारत के एक स्वतन्त्रता सेनानी, क्रान्तिकारी, विद्वान, इतिहासकार तथा कृषि वैज्ञानिक थे। वे गदर पार्टी के संस्थापकों में से एक थे। पाण्डूरंग खानखोजे का जन्म नवम्बर १८८३ में वर्धा में हुआ था। उनके पिता वर्धा में याचिका लिखने का कार्य करते थे। उनका बचपन वर्धा में ही बीता और वहीं उनकी प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल की शिक्षा पूरी हुई। उसके पश्चात उच्च शिक्षा के लिए वे नागपुर आ गए। उस समय वे महान स्वतन्त्रा सेनानी बालगंगाधर तिलक के राष्ट्रवादी कार्यों से बहुत प्रभावित थे। १९०० के प्रथम दशक में किसी समय वे भारत से बाहर जाने के लिए एक समुद्री यात्रा पर निकल पड़े और अन्ततः संयुक्त राष्ट्र अमेरिका जा पहुँचे। यहाँ उन्होने वाशिंगटन स्टेट कॉलेज में प्रवेश लिया जिसका नाम अब वाशिंगटन स्टेट विश्वविद्यालय है। वहाँ से उन्होने १९१३ में स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की।